स्थानीय समुदायों की मदद करें, कुशलता बढ़ाकर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें- उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने आज बंदरगाहों के सभी अध्यक्षों और प्रशासकों से बंदरगाहों को अधिक ऊर्जा सक्षम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए इस तरह के प्रयासों की जरूरत है।शिपिंग मंत्रालय द्वारा ममल्लापुरम में आयोजित की जा रही ‘चिंतन बैठक’ के दौरान प्रमुख बंदरगाह ट्रस्टों के अध्यक्षों के साथ बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति ने देश के सतत विकास के लिए विशाल समुद्र तटों का दोहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।


भारत के विकास की कहानी में देश के 7516 किलोमीटर लंबे तट, इसके 12 प्रमुख बंदरगाहों और 200 गैर-प्रमुख बंदरगाहों के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास बंदरगाह के जरिए विकास के लिए अच्छे मौके हैं क्योंकि निर्यात और आयात के लिए बंदरगाह जरूरी हैं।इस अवसर पर नायडू ने केन्द्र सरकार द्वारा शुरू किए गए सागरमाला बंदरगाह के जरिए विकास की भी सराहना की और कहा कि यह ग्रीनफील्ड बंदरगाह बनाने, मौजूदा बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और रोजगार के अवसर पैदा करके तटीय समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में सबसे अच्छा कदम है।


उपराष्ट्रपति ने बंदरगाहों को अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए अपने वित्तीय संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की सलाह दी। इसके लिए उन्होंने संचालन लागत एवं ड्रेजिंग खर्च कम करने और जहाज में माल लादने और उतारने में लगने वाले समय में बचत करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि हमें तटों के दोनों ओर अधिक पोतांतरण केन्द्र (ट्रांसशिपमेंट हब) बनाने की जरूरत है।उपराष्ट्रपति ने तटीय सामुदायिक विकास को बंदरगाह के जरिए विकास का एक अनिवार्य घटक बताते हुए सभी प्रशासकों और प्रबंधकों को सीएसआर गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने और स्थानीय युवाओं को कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार हासिल करने लायक बनाते हुए स्थानीय समुदायों का ध्यान रखने को कहा। उपराष्ट्रपति ने बंदरगाहों को स्वच्छ भारत जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय रुप से भाग लेने और शहर की स्वच्छता बनाए रखने में स्थानीय अधिकारियों को सहयोग देने का आग्रह किया।शिपिंग मंत्रालय द्वारा तटीय शहर ममल्लापुरम में तीन दिवसीय ‘चिंतन बैठक’ (28 फरवरी से 01 मार्च, 2020 तक) आयोजित की जा रही है। यह बैठक बंदरगाहों की विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा करने एवं उनका समाधान ढूंढ़ने और बंदरगाहों के विकास की संभावनाओं को तलाशने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।इस अवसर पर केंद्रीय शिपिंग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और रसायन एंव उर्वरक राज्य मंत्री मनसुख मंडाविया, शिपिंग सचिव गोपाल कृष्ण और प्रमुख बंदरगाह ट्रस्टों के अध्यक्ष उपस्थित थे।