पुनर्गठित कंपनी (ऑडिटर की रिपोर्ट) आदेश, 2020 की अधिसूचना

केन्द्र सरकार ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के राष्ट्रीय उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कॉर्पोरेट प्रशासन ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य के अनुपालन में कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143 की उप-धारा (11) के तहत प्रदत्त अधिकारों और कंपनी (ऑडिटर की रिपोर्ट) आदेश, 2016 के अधिक्रमण के तहत 25.02.2020 को कंपनी (ऑडिटर रिपोर्ट) आदेश, 2020 (सीएआरओ, 2020) को अधिसूचित किया है।


सीएआरओ 2020, 1 अप्रैल, 2019 को या उसके बाद शुरू होने वाले वित्तीय वर्षों के लिए पात्र कंपनियों के वित्तीय विवरणों के ऑडिट के लिए लागू है।जिन कंपनियों पर सीएआरओ, 2020 लागू होगा उनकी पात्रता के मापदंड को नहीं बदला गया है। इसलिए यह उन सभी कंपनियों पर लागू होगा, जिन पर सीएआरओ, 2016 लागू था।सीएआरओ 2020 पात्र कंपनियों के ऑडिटरों की ओर से उचित लचीलापन लाएगा और घोषणाओं में आवश्यक वृद्धि करेगा। इसे ऐसी कंपनियों के वित्तीय मामलों में बेहतर पारदर्शिता लाने के लिए तैयार किया गया है।


सीएआरओ, 2020 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:-



  1. सीएआरओ, 2020 में सीएआरओ, 2016 की तुलना में कुछ अतिरिक्त खण्ड शामिल हैं और सीएआरओ, 2016 के मौजूदा खण्ड को ऑडिटर्स से विस्तृत टिप्पणी प्राप्त करने के लिए फिर से तैयार किया गया है।

  2. ऐसी अचल संपत्तियों का विवरण देने के लिए एक विशेष प्रारूप उपलब्ध कराया गया है जिनका मालिकाना हक कंपनी के नाम नहीं हैं लेकिन उनका वित्तीय विवरणों में उल्लेख किया गया है।

  3. बेनामी संपत्ति रखने के लिए कंपनी के खिलाफ कार्यवाही के विवरण का खुलासा करना और पता लगाना है कि क्या कंपनी ने अपने वित्तीय विवरणों में इसका उल्लेख किया है।

  4. माल सूची (इनवेंट्री) के वस्तुगत सत्यापन के दौरान प्रत्येक श्रेणी की माल सूची के योग में 10% या उससे अधिक की विसंगतियों के बारे में सूचित करना होगा।

  5. ऑडिटर को इस बारे में विशेष विवरण प्रदान करना है कि क्या कंपनी को उसकी मौजूदा सम्पत्तियों की गारंटी के आधार पर बैंकों या वित्तीय संस्थानों से कुल 5 करोड़ से अधिक की कार्यकारी पूंजी सीमा की मंजूरी दी गई है और क्या ऐसे बैंकों या संस्थानों को कंपनी द्वारा त्रैमासिक रिटर्न और विवरण प्रस्तुत करना कंपनी की एकाउंट बुक के साथ हुए अनुबंध में शामिल हैं।

  6. सीएआरओ, 2020 के खण्ड 3(iii) में, ऑडिटर को इस बारे में विस्तृत जानकारी देनी होगी कि क्या कंपनी ने वर्ष के दौरान अन्य कंपनियों, फर्मों, सीमित दायित्व, भागीदारियों या किसी अन्य पार्टी को प्रदत ऋण, सुरक्षित या असुरक्षित रुप में या किसी प्रदत गारंटी या किसी ऋण या अग्रिम राशियों में निवेश किया है और ऐसे ऋण कंपनी के हितों के लिए हानिकारक नहीं हैं। 

  7. कंपनी द्वारा ऋणों या अन्य देनदारियों के पुनर्भुगतान या किसी अन्य ऋणदाता के ब्याज के भुगतान में अवधि और बकाया राशि के बारे में जानकारी देने के लिए एक विशेष प्रारुप निर्धारित किया गया है।

  8. आडिटरों को अपने वित्तीय अनुपातों, वित्तीय परिसंपत्तियों की प्राप्ति और वित्तीय देनदारियों की अवधि और अनुमानित दिनांकों, वित्तीय विवरणों के साथ अन्य जानकारी, निदेशक मंडल और प्रबंधन योजनाओं के बारे में ऑडिटर की जानकारी के आधार पर अपना मत देना अपेक्षित है कि ऑडिट रिपोर्ट की तारीख को कोई भी ऐसी अनिश्चितता मौजूद नहीं है कि जब भी जरूरत होगी कंपनी बैलेंस शीट की तारीख से एक वर्ष की अवधि में मौजूदा देनदारियों को पूरा करने में सक्षम है।

  9. वित्तीय वर्ष और उसके पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में हुई नकद हानि की राशि के बारे में सूचना देनी होगी।

  10. ऑडिटर को अपनी राय बनाने से पहले निवर्तमान ऑडिटर्स द्वारा उठाए गए मुद्दों, आपत्तियों या चिंताओं को ध्यान में रखना होगा।

  11. ऑडिटर से कंपनी के बारे में यह रिपोर्ट देना अपेक्षित है कि क्या कंपनी किसी बैंक/ वित्तीय संस्थान या अन्य ऋणदाता की जानबूझकर बकायादार घोषित हुई है।  

  12. ऑडिटर को यह भी रिपोर्ट करनी होगी कि क्या टर्म ऋण उसी उद्देश्य में लगाए गए हैं जिनके लिए वे प्राप्त किए गए थे। ऐसा नहीं होने पर ऋण में इस प्रकार किए गए बदलाव और उसका कहां उपयोग किया गया है इस बारे में जानकारी देनी होगी।

  13. ऑडिटर को अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी देना आवश्यक है कि क्या वर्ष के दौरान कंपनी द्वारा कोई धोखाधड़ी की गई है या कंपनी के साथ धोखाधड़ी होने का पता चला है अगर ऐसा है तो इस धोखाधड़ी के स्वरूप और उसमें कितनी राशि शामिल है।

  14. ऑडिटर को वर्ष के दौरान कंपनी के ऑडिट में प्राप्त गंभीर शिकायतों पर विचार करना है।

  15. ऑडिटर को यह रिपोर्ट करना है कि क्या कंपनी ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक से वैध पंजीकरण प्रमाण-पत्र के बिना किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय या आवास वित्त गतिविधियों का संचालन किया है।

  16. ऑडिटर से अब यह अपेक्षित है कि वह वित्तीय विवरणों में शामिल कंपनियों की सीएआरओ रिपोर्ट में संबंधित लेखा परीक्षकों द्वारा सहायक कंपनियों और उप-खण्ड संख्या में निहित संबंधित ऑडिटरों की योग्यता / प्रतिकूल टिप्पणियों के विवरण के बारे में सूचित करे।


सीएआरओ, 2020 से कंपनियों के वित्तीय विवरणों पर ऑडिचरों द्वारा रिपोर्टिंग की समग्र गुणवत्ता में काफी सुधार आने की उम्मीद की जा रही है। इससे कंपनियों के वित्तीय मामलों में अधिक पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा मिलेगा। इसके द्वारा भारतीय कंपनियों में और उनके द्वारा निवेश के अधिक प्रवाह आने की उम्मीद है।