प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 32 परियोजनाओं को मंजूरी

केन्‍द्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल की अध्‍यक्षता में नई दिल्‍ली में हुई अंतर-मंत्रालयी अनुमोदन समिति (आईएमएसी) की बैठक में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की ‘यूनिट’ स्‍कीम के तहत 406 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना वाली 17 राज्‍यों की कुल 32 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।ये परियोजनाएं लगभग पंद्रह हजार व्यक्तियों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के सृजन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों पर केन्द्रित हैं। आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों से कृषि उपज को ज्‍यादा दिन सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे किसानों की लगातार आमदनी होती रहती है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय किसानों को उपभोक्ताओं से जोड़ने में खाद्य प्रसंस्करण की महत्वपूर्ण भूमिका है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अर्थव्यवस्था की दिशा में बेहतर योगदान के लिए किसानों, सरकार और बेरोजगार युवाओं के बीच कड़ी का काम कर सकता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार व्यवसाय में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है और इसके तहत इसने संयुक्त उपक्रम, विदेशी सहयोग, औद्योगिक लाइसेंस और 100 प्रतिशत निर्यात उन्मुख इकाइयों के प्रस्तावों को मंजूरी दी है।


इस योजना का मुख्य उद्देश्य मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का आधुनिकीकरण / विस्तार, और मूल्य वर्धन करना है तथा उनकी प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमताओं को बढ़ाकर कृषि उपज की बर्बादी को रोकना है।अपनी असीम क्षमताओं के कारण खाद्य क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। पिछले पांच वर्षों से इसकी सकल वार्षिक विकास दर (सीएजीआर) करीब 8 प्रतिशत बनी हुई है। जिन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, वे देश के 100 कृषि जलवायु क्षेत्र में हैं। देश के खाद्य प्रसंस्‍करण बाजार के 14.6 प्रतिशत सीएजीआर की दर से 2020 तक बढ़कर 543 अरब डॉलर का हो जाने की संभावना है। 2016 में यह 322 अरब डॉलर था।  खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्रालय ने 2016-20 की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये की लागत से पीएमकेएसवाई योजना शुरू की है। इसके तहत मेगा फूड पार्क लगाने, एकीकृत प्रशीतन गृहों की श्रृंखला, मूल्‍यवर्धन अवसंरचना, कृषि प्रसंस्‍करण क्‍लस्‍टरों के लिए अवसंरचना विकास तथा अन्‍य कई तरह की सुविधाएं शुरू की गई हैं।  


उपरोक्त परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए अंतर-मंत्रालयी अनुमोदन समिति (आईएमएसी) की बैठक 21 से 26 फरवरी को हुई।