कोई भी चीज तभी गुम होती है जब मां उसे तलाश न कर सके-लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लो

लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लो ने कहा कि ऑपरेशन मां का परिणाम बहुत उत्साहव‌र्द्धक है। कोई भी चीज तभी गुम होती है जब मां उसे तलाश न कर सके। हमने सभी आतंकरोधी अभियानों के दौरान आतंकियों को सरेंडर कर मुख्यधारा में शामिल होने का मौका दिया है। कई बार हमने बीच में ही मुठभेड़ को रोका है। आतंकियों के परिजनों  रिश्तेदारों व गणमान्य नागरिकों की मदद से उन्हें हथियार डालने के लिए मनाने का प्रयास किया है। हम अपने इरादों में कई बार सफल रहे हैं। भारतीय सेना ऑपरेशन मां चला रही है। इसके तहत आतंकवादी बन चुके युवाओं को समझाने-बुझाने के लिए उनकी मां या परिवार के सदस्यों को मौका दिया जाता है। ऑपरेशन मां शुरू करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कंवर जीत सिंह - केजेएस ढिल्लों बताते हैं कि इससे काफी युवकों को वापस लाया गया है और अभियान बहुत ज्यादा सफलता बटोर चुका है।
आतंकी गुटों में युवकों की भर्ती में आई ग‍िरावट जम्‍मू-कश्‍मीर के लोग दे रहे सेना का साथ सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लो ने शुक्रवार को कहा कि घाटी में आतंकी अलग-थलग पड़ गए हैं। ऑपरेशन मां के कारण आतंकी गुटों में स्थानीय युवकों की भर्ती में भी कमी आई है। आतंकियों के नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है। लोग उनका साथ नहीं दे रहे हैं क्योंकि सेना ने आतंकरोधी अभियानों में पीपुल फ्रेंडली (जन सहयोग रणनीति) को अपनाया है। आतंकी संगठनों में भर्ती रोकने और आतंकी बने युवकों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए ही चिनार कोर कमांडर ने ऑपरेशन मां शुरू किया है। इसके तहत अगर घेराबंदी में कोई आतंकी फंस जाता है तो उसे जिंदा पकड़ने या आत्मसमर्पण करने के लिए उसकी मां की मदद ली जाती है। आतंकी बने युवकों को भी मुख्यधारा में लाने के लिए भी उनकी मां की मदद ली जाती है।