भारत की गणना दुनिया के 12 शीर्ष जैव प्रौद्योगिकी स्थलों में

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का जैव प्रौद्योगिकी विभाग 26 फरवरी, 2020 को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई) में अपना 34वां स्थापना दिवस मनाएगा।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे और पुरस्कार प्रदान करेंगे। अपने अस्तित्व में आने के बाद विभाग ने देश भर में विभिन्न स्तरों पर विभिन्न अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संगठनों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं आदि में कार्यरत वैज्ञानिकों के योगदान को प्रोत्साहित करने और उसे पहचान प्रदान करने के लिए विभिन्न पुरस्कारों की शुरूआत की। डीबीटी द्वारा शुरू किए गए विभिन्न पुरस्कारों को अब समग्र रूप से डीबीटी ब्राइट (बायोटेक्नोलॉजी, रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस पुरस्कार) के नाम से जाना जाता है। विभाग ने भारतीय विज्ञान को उल्लेखनीय योगदान देने वाले देश के कुछ ऐसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के सम्मान में कुछ पुरस्कारों को नया नाम दिया है, जो दुनिया भर में वैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं।


डीबीटी ब्राइट पुरस्कार में डीबीटी द्वारा दिए जाने वाले निम्नलिखित पुरस्कार शामिल हैं:-



  1. हर गोविंद खुराना – नवोन्मेष युवा जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक पुरस्कार

  2. एस रामचंद्रन – करियर बनाने के लिए राष्ट्रीय जैव विज्ञान पुरस्कार

  3. जानकी अम्मल राष्ट्रीय महिला जैव वैज्ञानिक पुरस्कार

  4. टाटा नवोन्मेष फैलोशिप पुरस्कार

  5. जैव प्रौद्योगिकी सामाजिक विकास पुरस्कार


डीबीटी स्थापना दिवस व्याख्यान जाने-माने वैज्ञानिक, एल वी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट, हैदराबाद के अवकाश प्राप्त निदेशक पद्मश्री डॉ. डी. बालासुब्रमण्यम देंगे।


भारत में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र पिछले तीन दशकों में विकसित हुआ है और इसने विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर स्वास्थ्य, कृषि आदि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार और निजी क्षेत्र से काफी समर्थन मिलने के कारण जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र काफी तेजी से विकसित हुआ है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत है। भारत की गणना दुनिया के 12 शीर्ष जैव प्रौद्योगिकी स्थलों में होती है।