70 दिनों से जारी प्रदर्शन के दौरान शनिवार को सड़क खोलने और बंद करने का नजारा देखने को मिला।

 शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ पिछले 70 दिनों से जारी प्रदर्शन के दौरान शनिवार को सड़क खोलने और बंद करने का नजारा देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों के एक धड़े ने रास्ता खोलकर स्थानीय लोगों को जाने दिया। थोड़ी ही देर बाद दूसरे गुट ने वहां पहुंचकर रास्ता फिर बंद कर दिया। कालिंदी कुंज की सड़क नंबर 9 पर एक बार फिर बैरिकेडिंग दिखी। इस घटनाक्रम की पुष्टि दिल्ली पुलिस के साउथ ईस्ट डीसीपी आरपी मीणा ने की। 


शनिवार सुबह ही मध्यस्थ सीनियर वकील संजय हेगड़े और एडवोकेट साधना रामचंद्रन शाहीन बाग पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने एक ओर का रास्ता खोलने का विकल्प रखा। प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि जितनी दूरी में प्रदर्शन है उतनी दूर डिवाइडर पर एल्युमीनियम की चादर लगाकर सड़क को बांट दिया जाए। प्रोटेस्ट को 24 घंटे सुरक्षा मुहैया कराई जाने के संबंध में आदेश जारी करे क्योंकि उन्हें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट सुरक्षा पर भरोसा दिलाए। प्रदर्शनकारियों ने 15 दिसंबर और उसके बाद शाहीन बाग और जामिया में सीएए के खिलाफ जुलूसों के दौरान हुई हिंसा की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस दौरान लोगों पर दर्ज किए केस और नोटिस को वापस लिया जाने की मांग की गई है। पुलिस पर सीएए प्रदर्शनों के दौरान बर्बरता का आरोप लगाते हुए जांच और जामिया हिंसा मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। इसके अलावा शाहीन बाग पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले नेताओं पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन को लेकर बीच का रास्ता निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्यस्थ नियुक्त किए गए हैं। बीते चार दिन, बुधवार से लगातार ये मध्यस्थ शाहीन बाग जे रहे हैं।