निर्माता, संपादक और निर्माण निर्देशक (डीओपी) मेयसम मखमलबफ ने कहा कि मनोरंजन, अर्थ और जादू मोहसिन मखमलबफ की फिल्‍मों के तीन प्रमुख

'मार्घे एंड हर मदर' एक बहुत यथार्थवादी फिल्‍म है जिसमें मार्घे इतालवी नव-यथार्थवाद और ईरान की नई लहर के तत्वों को शामिल किया गया है, क्योंकि इसमें यह दिखाने की कोशिश की गई है कि आर्थिक परेशानियों के कारण किस प्रकार क्लाउडिया और उसकी बेटी मार्घे का जिंदगी बदल जाती है। ऐसा इस फिल्‍म के निर्माता, संपादक और निर्माण निर्देशक (डीओपी) मेयसम मखमलबफ का कहना है। वे भारतीय अंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म महोत्‍सव गोवा के अंतिम दिन संवाददाता सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। 'मार्घे एंड हर मदर' इस महोत्‍सव की समापन फिल्म होगी। इस फिल्म के कलाकार डानिलो ग्लूसपे पाओलो तथा कारमाइन सैंटेरो भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


इस फिल्‍म का निर्देशन दुनिया के जाने-माने ईरानी निर्देशक मोहसिन मखमलबफ ने किया है। उन्‍होंने अलग-अलग देशों में 10 फिल्‍में बनाई हैं। उनकी सभी फिल्‍मों में उस देश की आत्‍मा को पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया है जिस देश में वह फिल्‍म बनाई गई है। इटली में बनाई गई उनकी यह पहली फिल्‍म है जिसमें इटली में जीवन की वास्‍तविकता को दर्शाया गया है। मेयसम ने बताया कि इटली में सत्‍ता के तीन केन्‍द्र है जिनके नाम हैं – केन्‍द्र सरकार, चर्च और माफिया।पश्चिम और पूर्व में सेंसरशिप में काफी अंतर है। पूर्व में सेंसरशिप वैचारिक ज‍बकि पश्चिम में धन से प्रभावित है।मोहसिन मखमलबफ यथार्थवादी फिल्में बनाने में विश्वास करते हैं। उनकी फिल्म में सबसे प्रमुख तत्‍व अभिनेता है जो  कैमरे के सामने अभिनय करता है। उसे ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। 'मार्घे एंड हर मदर' में पहली बार अभिनय करने वाले कलाकारों का उपयोग करके वास्तविक जीवन को चित्रित किया गया है। फिल्‍म में निर्देशक ने संवादों को थोपा नहीं है बल्कि ये अभिनेताओं के दिल से निकलते हैं।



मोहसिन की फिल्म निर्माण की शैली के बारे में और जानकारी देते उन्‍होंने कहा कि उनकी फिल्मों में तीन प्रमुख तत्‍व होते हैं - पहला मनोरंजन दूसरा सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक अर्थ तथा तीसरा फिल्म का जादू है। फिल्म का जादू दर्शकों को उस सही अर्थ को बताने में सक्षम नहीं है जो वे चाहते हैं। मोहसिन के लिए फिल्म का विषय अपनी शैली को तय करता है, जबकि मुख्यधारा की फिल्मों में इसके विपरीत होता है।फिल्म में बहुत कम उपयोग किया गया है। पूरी फिल्म को हाथ से पकड़े द्वारा कैमरे से शूट किया गया है। कलाकार डेनिलो ग्लूसेप पाओलो और कारमाइन सैंटेरमो जो पहली फिल्म में काम कर रहे हैं उन्होंने इस फिल्‍म में जिस तरह का प्रदर्शन किया है वह मोहसिन मखमलबाफ के प्रशिक्षण के कारण ही संभव हो सका है।