डॉ. जितेन्‍द्र सिंह जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर दो दिवसीय सम्‍मेलन का उद्घाटन करेंगे |

   प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) तमिलनाडु एवं केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू–कश्‍मीर की सरकारों के सहयोग से 30 नवम्‍बर से लेकर 01 दिसंबर, 2019 तक जम्‍मू में जल शक्ति और आपदा प्रबंधन पर फोकस करते हुए 'एक भारत श्रेष्‍ठ भारत' पर दो दिवसीय सम्‍मेलन का आयोजन करेगा।


     पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (डोनर) मंत्रालय के राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्‍य मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह  इस दो दिवसीय सम्‍मेलन का उद्धाटन करेंगे। केन्‍द्र शासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर के उपराज्‍यपाल श्री जी.सी. मुर्मू, तमिलनाडु सरकार में राजस्‍व व आपदा प्रबंधन मंत्री आर.बी. उदयकुमार, केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्‍यपाल आर.के. माथुर, जल संसाधन सचिव यू.पी. सिंह और जम्‍मू-कश्‍मीर के मुख्‍य सचिव बी.वी.आर. सुब्रमण्‍यम भी उद्धाटन सत्र को संबोधित करेंगे।इस अवसर पर राज्‍य मंत्री (पीपी) ई-पत्रिका 'न्‍यूनतम सरकार अधिकतम शासन' के विशेष अंक का विमोचन करेंगे, जो केन्‍द्र शासित प्रदेशों जम्‍मू–कश्‍मीर एवं लद्दाख में गवर्नेंस से जुड़े सफल नवाचारों और भारत सरकार के लोक शिकायत पोर्टल 'सीपीजीआरएएमएस' तथा जम्‍मू–कश्‍मीर के पोर्टल 'आवाज-ए-अवाम' के एकीकरण पर आधारित है।सम्‍मेलन के पहले दिन चार तकनीकी सत्र इन विषयों पर आयोजित किए जाएंगे : 'नदियों का कायाकल्प- कावेरी और झेलम', 'कृषि में जल खपत को कम करना', 'जल योद्धाओं की चर्चा' और 'जल शक्ति मिशन पर कलेक्टरों की राय।' सम्‍मेलन के दूसरे दिन  'शहरों में बाढ़' पर तकनीकी सत्र आयोजित किया जाएगा। इस सम्‍मेलन में उपस्थित वक्‍तागण 'बाढ़ प्रबंधन', 'पूर्वानुमान एवं पूर्व चेतावनी', 'आपातकालीन कार्रवाई', और 'एनडीआरएफ के बचाव परिचालन – 2014 श्रीनगर बाढ़ तथा 2015 चेन्‍नई बाढ़' पर अपने-अपने विचार पेश करेंगे। इसके बाद संबंधित विभागों इस बारे में चर्चाएं करेंगे। समापन समारोह में 'सहयोग संकल्‍प' प्रस्‍ताव का अनुमोदन किया जाएगा।  


इस सम्‍मेलन में राज्‍य सरकार के 350 प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें जिला कलेक्‍टर/जिला पुलिस अधीक्षक/एसडीआरएफ/अतिरिक्‍त जिला कलेक्‍टर/सिविल सोसायटी/इंजीनियरिंग विभाग/खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग/संचार विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा बाढ़ प्रभावित परिवार भी शामिल हैं।